मैं इक लाश हुं

मैं इक लाश हुं
इस रोड़ पर पड़ा इक अनजान लाश! 
घबराइये मत, मैं नहीं मरा इस कोरोना महामारी से, 
न ही मरा मैं भूख की लाचारी से! 
मैं तो मरा हुं साहब, इस देश को सम्भालने वाले झूठे ठेकेदारो से! 

अरे साहब, खामोश रहिये, नाम न लिजीए
या मेरी मानिये, तो आप भी बिछा लिजीए बिस्तर मेरे साथ ही
नहीं तो मर जाएगें खाक ही
मेरा क्या, मैं इक लाश हुं! 

पहले मेरी आवाज इनको सुनाई नहीं देते थे
मेरे आंसू दिखाई नहीं देते थे
पर अब मैं आजाद हुं
क्योंकि, मैं इक लाश हुं! 

अब मैं यूँ रोड़ पर पड़ा- पड़ा 
बोल सब रहा हूँ, 
बस आवाज की शक्ल 
मेरे शरीर पर पड़े, मेरे घावों ने ले लिए, 
जो कई किलोमीटर दूर चल मेरे साथी बन लिए! 

साहब, मैं जहाँ जहाँ गया
बस इस देश के ठेकेदारो ने मुझे कभी गालियाँ, कभी डंडा तो कभी झूठे आसवासन दिए
बस एक यहीं घाव है, जो हर पल मेरे साथ रहें! 

मैं एक कदम चलता, तो ये दो कदम, 
और टूट गई जब चप्पल मेरी, और चुभा कोई कांटा, 
तो मुझसे पहले बहाया खून भी तो मेरे घाव ने ही
तो कैसे न कहुँ मैं इन्हें अपना दोस्त, जिन्होंने निभाया मेरा साथ मौत के हर इक सांस में! 
अब मेरी ही तरह ये भी खामोश है, क्योंकि अब ये भी इक लाश है! 

ना ना ना, मेरी फोटो मत खींचों,
अरे साहब, अब क्या करोगे मुझे अखबारों में हीरो बनाकर
सच तो ये है कि अब मैं इक लाश हुं! 
नहीं महत्वाकांक्षा मुझे अखबारों में आने की, 
और न ही टी.वी. दुनिया में घुमने की! 
अब तो मुझे कहीं भी फेक दो, 
चाहों तो मुझे इसी रोड़ पर पड़ा छोड़ दो, 
क्योंकि अब मैं बेजान हुं, मैं इक लाश हुं! 
                      
                                  -----तानिया शर्मा----

Comments

  1. Dukhant rachana.. Jivan kushi se jio. Dukh Or sukh to laga rehta hay

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