अस्मिता की पहचान

अस्मिताओं के इस कटघरे में
आज खुद को भी खड़ा पाया हैं, 

                पुछा हैं सवाल आज खुद से यह
                अब तक के जीवन में मैंने क्या कमाया हैं, 

कमाई तो हैं पूंजी बहुत
और ईंट कंकड़ का घर बनाया हैं, 

                फिर भी न जाने क्यों
                सुकून मुझसे कोसों दूर समाया हैं, 

प्रश्न हैं अब भी मन में यहीं, 

क्या मैंने अपनी अस्मिता को उसका सही हक़ दिलाया हैं?
क्या मैंने अपनी अस्मिता को उसका सही हक़ दिलाया हैं??? 

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