रिहाई

नहीं चाह अब मुझे किसी चीज की
अब तो जिंदगी से रिहाई चाहिए!

बहुत रह ली बेड़ियों में
अब जिन्दगी से न रुसवाई चाहिए!

थक चुकी हुं संकीर्ण मानसिकता से लड़ते लड़ते,
अब जिन्दगी में कुछ नई ऊचांई चाहिए!

खुद कहोगे तुम एक दिन मुझे सही
मुझे उस दिन की एक खास परछाई चाहिए!

नहीं चाह अब मुझे कीसी चीज की
अब तो जिंदगी से रिहाई चाहिए!

बहुत रह ली बेड़ियों में
अब जिंदगी से न रुसवाई चाहिए!
       ----तानिया शर्मा----

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